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कुलार्णव • अध्याय 7 • श्लोक 18
तस्मात् सुलक्षणां शक्तिं गन्धपुष्पाक्षतादिभिः । अभ्यर्च्य देवताबुद्ध्या भोगपात्रं निवेदयेत् ॥
अतः सुलक्षणा शक्ति को देवता मान कर गन्ध पुष्पाक्षत आदि से उसका पूजन कर उसे भोगपात्र प्रदान करे।
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