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कुलार्णव • अध्याय 7 • श्लोक 58
यावन्नेन्द्रियवैकल्यं यावन्नो मुखवैकृतम् । तावदेव पिबेन्मद्यमन्यथा पतनं भवेत् ॥
जब तक इन्द्रियों में विकलता न हो, मुख में विकृति न हो, तब तक मद्यपान करे। इससे अधिक पान करने से पतन होता है।
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