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कुलार्णव • अध्याय 7 • श्लोक 14
अङ्गुष्ठानामिकाभ्याञ्च बटुकस्य बलिः स्मृतः । तर्जनीमध्यमानामिकाङ्गुष्ठैर्योगिनीबलिः ॥ अङ्गुलीभिश्च सर्वाभिरुक्तो भूतबलिः प्रिये । अङ्गुष्ठतर्जनीभ्याञ्च क्षेत्रपालबलिर्भवेत् । अङ्गुष्ठमध्यमाभ्याञ्च राजराजेश्वरस्य च ॥
बटुकादि बलि में अंगुलि नियम - हे प्रिये! अंगुष्ठ अनामिका से वटुक को, तर्जनी, मध्यमा, अनामा, अंगुष्ठ से योगिनी को, सभी अंगुलियों से सर्वभूत को, अंगुष्ठ तर्जनी से क्षेत्रपाल को और अंगुष्ठ मध्यमा से राजराजेश्वर को बलि दे।
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