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कुलार्णव • अध्याय 7 • श्लोक 43
स्थूलान्तमात्मतत्त्वं स्यात् सूक्ष्मं विद्यान्तगोचरम् । परान्तं शिवतत्त्वं स्यादिति तत्त्वत्रयं जगत् ॥
'आत्मतत्त्व' स्थूल देह तक रहता है। 'विद्यातत्त्व' सूक्ष्म शरीर तक दिखाई देता है और 'शिवतत्त्व' परदेह तक है। सारा जगत् तत्त्वत्रयात्मक है।
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