१. दिव्य, २. वीर, ३. पशु - इस क्रम से पान तीन प्रकार का कहा गया है। देवी के आगे पान करना 'दिव्य', मुद्रासन के साथ पान करना 'वीर' और स्वेच्छापूर्वक पशु के समान पिया गया 'पशुपान' है।
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