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कुलार्णव • अध्याय 7 • श्लोक 10
तारत्रयं वदेद्देहियुग्मं देवीपदं वदेत् । पुत्राय बटुकनाथाय पश्चादुच्छिष्टहारिणे । सर्वविघ्नान् पदं पश्चात् नाशयद्वितयं तथा ॥ गृहणयुग्मं रुरुपदं क्षेत्रपालपदं ततः । सर्वोपचारसहितामिमां पूजां बलिं वदेत् । गृहण गृहण द्विठान्तोऽयं क्षेत्रपालमनुः प्रिये ॥ चतुःषष्ट्यक्षरैः प्रोक्तः सर्वसिद्धिप्रदायकः । योऽस्मिन् क्षेत्रे निवासी च क्षेत्रपालस्य किङ्करः । प्रीतोऽयं बलिदानेन सर्वरक्षां करोतु मे ॥
क्षेत्रपालबलि के मन्त्र - ॐ ॐ ॐ देहि देहि देवीपुत्राय बटुकनाथाय उच्छिष्टहारिणे सर्वविघ्नान् नाशय नाशय गृहण गृह्मण रुरु क्षेत्रपाल सर्वोपचार-सहितामिमां पूजां बलिं गृहण गृहण स्वाहा। हे प्रिये! यह ६४ अक्षरों का सर्वसिद्धिप्रदायक क्षेत्रपाल का मन्त्र है। इससे बलि देकर प्रार्थना करे:- योऽस्मिन् क्षेत्रे निवासी च क्षेत्रपालस्य किङ्करः । प्रीतोऽयं बलिदानेन सर्वरक्षां करोतु मे ॥
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