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कुलार्णव • अध्याय 7 • श्लोक 25
सुरूपा तरुणी शान्ता कुलाचारयुता शुचिः ॥ शङ्काहीना भक्तियुक्ता गूढा शास्त्रोपजीविनी । अलोलुपा सुशीला च स्मितास्या प्रियवादिनी ॥ गुरुदैवतसम्भक्ता सुचिता कौलिकप्रिया । विमत्सरा विशेषज्ञा देवताराधनोत्सुका । मनोहरा सदाचारा शक्तिरेषा सुलक्षणा ॥
'सुलक्षणा' शक्ति वह है, जो सुन्दर रूप वाली, तरुणी, शान्ता, कुलाचार परायणा, पवित्रा, शङ्कत से हीन, भक्तियुता, गूढ़ रहस्य-युता, शास्त्र को मानने वाली, लोभहीना, सुशीला, जिसके मुख पर मुस्कान हो, मधुरभाषिणी, गुरु और देवता की भक्ति से युक्त, अच्छे विचार बाली, कौलिकों को चाहने वाली, ईर्ष्या एवं द्वेष से रहिता, विशेष बातों की जानने वालो, देवाराधन में रुचि रखने वाली, मनोहरा और सदाचारिणी हो।
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