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कुलार्णव • अध्याय 7 • श्लोक 59
पूर्णाभिषेकयुक्तानां पानं देवि निगद्यते । कराभ्यां पात्रमुद्धृत्य स्मरेन्यूलञ्च पादुकाम् । आगलान्तं पिबेद्रव्यं स मुक्तो नात्र संशयः ॥
हे देवि! पूर्णाभिषिक्तों के पान की विधि कहता हूँ - दोनों हाथों से पात्र को उठाकर मूलमन्त्र और पादुका को स्मरण करे। कण्ठ तक पान करे, तो मुक्त होता है, इसमें सन्देह नहीं।
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