अध्याय 1 — भक्तिसूत्र
भक्तिसूत्र
84 श्लोक • केवल अनुवाद
कुमार (सनत्कुमारादि), वेदव्यास, शुकदेव, शाण्डिल्य, गर्ग, विष्णु , कौण्डिन्य, शेष, उद्धव, आरुणि, बलि, हनूमान्, विभीषण आदि भक्तितत्त्व के आचार्यगण लोगों की निन्दास्तुति का कुछ भी भय न कर (सब) एकमत से ऐसा ही कहते हैं (कि भक्ति ही सर्वश्रेष्ठ है)।