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भक्तिसूत्र • अध्याय 1 • श्लोक 81
त्रिसत्यस्य भक्तिरेव गरीयसी, भक्तिरेव गरीयसी ॥
तीनों (कायिक, वाचिक, मानसिक) सत्यों में (अथवा तीनों कालों में सत्य भगवान्‌ की) भक्ति ही श्रेष्ठ है, भक्ति ही श्रेष्ठ है।
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