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भक्तिसूत्र • अध्याय 1 • श्लोक 4
यल्लब्ध्वा पुमान्‌ सिद्धो भवति, अमृतो भवति, तृप्तो भवति॥
जिसको (परम प्रेमरूप और अमृतरूप भक्ति को) पाकर मनुष्य सिद्ध हो जाता है, अमर हो जाता है, (और) तृप्त हो जाता है।
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