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भक्तिसूत्र • अध्याय 1 • श्लोक 38
मुख्यतस्तु महत्कृपयैव भगवत्कृपालेशाद्वा॥
परन्तु (प्रेमभक्ति की प्राप्ति का साधन) मुख्यतया (प्रेमी) महापुरुषों की कृपा से अथवा भगवत्कृपा के लेशमात्र से होता है।
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