सुखदुःखेच्छालाभादित्यक्ते काले प्रतीक्ष्यमाणे क्षणाद्द्वमपि व्यर्थ न नेयम्॥
सुख, दुःख, इच्छा, लाभ आदिका (पूर्ण) त्याग हो जाय ऐसे काल की बाट देखते हुए आधा क्षण भी (भजन बिना) व्यर्थ नहीं बिताना चाहिये।
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