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भक्तिसूत्र • अध्याय 1 • श्लोक 22
तत्रापि न माहात्म्यज्ञानविस्मृत्यपवाद: ॥
इस अवस्था में भी (गोपियों में) माहात्म्यज्ञान की विस्मृति का अपवाद नहीं।
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