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भक्तिसूत्र • अध्याय 1 • श्लोक 68
कण्ठावरोधरोमांचा श्रुभि: परस्पर॑ लपमाना: पावयन्ति कुलानि पृथिवीं च॥
ऐसे अनन्य भक्त कण्ठावरोध, रोमांच और अभ्रुयुक्त नेत्रवाले होकर परस्पर सम्भाषण करते हुए अपने कुलों को और पृथ्वी को पवित्र करते हैं।
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