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भक्तिसूत्र • अध्याय 1 • श्लोक 65
तदर्पिताखिलाचारः सन्‌ कामक्रोधाभिमानादिकं तस्मिनेव करणीयम्‌॥
सब आचार भगवान के अर्पण कर चुकने पर यदि काम, क्रोध, अभिमानादि हो तो उन्हें भी उस (भगवान्‌) के प्रति ही करना चाहिये।
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