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भक्तिसूत्र • अध्याय 1 • श्लोक 48
यः कर्मफलं त्यजति, कर्माणि संन्यस्यति ततो निरद्धन्द्रो भवति॥
जो कर्मफल का त्याग करता है, कर्मो का भी त्याग करता है और तब सब कुछ त्यागकर जो निरद्धन्द्द हो जाता है।
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