यो विविक्तस्थानं सेवते, यो लोकबन्धमुन्मूलयति, निस्त्रैगुण्यो भवति, योगक्षेम॑ त्यजति॥
जो निर्जन स्थान में निवास करता है, जो लौकिक बन्धनों को तोड़ डालता है, जो तीनों गुणों से परे हो जाता है और जो योग तथा क्षेम का परित्याग कर देता है।
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