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भक्तिसूत्र • अध्याय 1 • श्लोक 19
नारदस्तु तदर्पिताखिलाचारिता तद्ठविस्मरणे परमव्याकुलतेति॥
परन्तु देवर्षि नारद के मत से अपने सब कर्मो को भगवान्‌ के अर्पण करना और भगवान्‌ का थोड़ा-सा भी विस्मरण होने में परम व्याकुल होना ही भक्ति है।
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