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भक्तिसूत्र • अध्याय 1 • श्लोक 32
न तेन राजपरितोष: शक्षुधाशान्तिर्वा॥
न उससे (जान लेने मात्र से ) राजा की प्रसन्नता होगी, न क्षुधा मिटेगी।
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