(विधिनिषेध से अतीत अलौकिक प्रेम-प्राप्ति करने का मन में) दृढ़ निश्चय हो जाने के बाद भी शास्त्र की रक्षा करनी चाहिये। अर्थात् भगवदनुकूल शास्त्रोक्त कर्म करने चाहिये।
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