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भक्तिसूत्र • अध्याय 1 • श्लोक 46
कस्तरति कस्तरति मायाम्‌ , यः संगांस्त्यजति यो महानुभावं सेवते, निर्ममो भवति॥
(प्रश्न) कौन तरता है? (दुस्तर) मायासे कौन तरता है? (उत्तर) जो सब संगों का परित्याग करता है, जो महानुभावों की सेवा करता है और जो ममतारहित होता है।
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