Krishjan
🇺🇸 EN
🇮🇳 हिन्दी
मुख्य पृष्ठ
शास्त्र
परिचय
ऐप इंस्टॉल करें
मुख्य पृष्ठ
शास्त्र
परिचय
ऐप इंस्टॉल करें
अध्याय 15 — अथ नक्षत्रव्यूहाध्यायः
बृहत्संहिता
32 श्लोक • केवल अनुवाद
श्वेत पुष्य, अग्निहोत्री, मन्त्र जानने वाले, यज्ञशास्त्र को जानने वाले, वैयाकरण, खान, आकरिक, हजाम, ब्राह्मण, कुम्भार, पुरोहित, ज्यौतिषये सब कृत्तिका नक्षत्रगत पदार्थ है ।
सुव्रत, पण्यवृत्ती, राजा, योगी, गाड़ी से आजीविका चलाने वाले, गौ, बैल, जल में रहने वाले जन्तु, किसान, पर्वत, ऐश्वर्ययुक्त- ये सब पदार्थ रोहिणी नक्षत्रगत हैं।
सुगन्धियुक्त द्रव्य, वस्त्र, जलोत्पन्न द्रव्य, पुष्प, फल, रस, वनवासी, पक्षी, मृग, सोमरस का पान करने वाले, विद्या जानने वाले, कामी, पत्रवाहक ये सब पदार्थ मृगशिर है ।
वध करने वाले, प्राणियों को बाँधने वाले, असत्य भाषण करने वाले, पर-स्त्रीगामी, चोर, शठ (धूर्त), भेद कराने वाले, भूसी वाले धान्य, क्रूर, मन्त्र को जानने वाले, अभिचारज्ञ ( वशीकरण आदि कर्मों को जानने वाले), वेताल के उत्थापन का कर्म जानने वाले-ये सब आर्द्रा नक्षत्रगत पदार्थ हैं।
सत्य भाषण करने वाले, दानी, शौचयुत (शुद्ध), दूसरे के धनादि का लोभ नहीं करने वाले, कुलीन, सुन्दर, बुद्धिमान, यशस्वी, धनी, उत्तम धान्य, वणिक्, सेयक, शिल्पी ये सब पुनर्वसु नक्षत्रगत पदार्थ हैं।
यब, गेहूँ, धान्य, ईख (गन्ना), यन, मन्त्री, राजा, जल से आजीविका चलाने वाले (घीवर आदि), सज्जन, याज्ञिक (पुत्रकाम्य आदि यज्ञ कराने वाले ) - ये सब पदार्थ पुष्य नक्षत्रगत हैं।
कृत्रिम द्रव्य, कन्द, मूल, फल, कोट, सर्प, विष, दूसरे के धन का हरण करने वाले, भूसी वाले धान्य, सभी प्रकार की औषधियों का प्रयोग करने वाले ये सब आश्लेषा नक्षत्रगत पदार्थ हैं।
धनी, धान्यागार, पर्वत पर रहने वाले, पिता-माता के सेवक, व्यापारी, शूर, मांसाहारी, खोद्वेषी- ये सब मभा नक्षत्रगत पदार्थ हैं।
नाचने वाले, खियाँ, सों के प्रिय, गानविद्या को जानने वाले, शिल्पी, विक्रय या क्रय-द्रव्य, कार्पास (रुई), नमक, शहद, तेल, बालक- ये सभी पदार्थ पूर्वफाल्गुनी नक्षत्रगत हैं
कोमल हृदय वाले, शुद्ध (दूसरे के धनादि को नहीं चाहने वाले), नीतिज्ञ, पाखण्डी (बेदनिन्दक), दानी, शाखों में निरत, सुन्दर धान्य, अतिशय धनी, कर्म में निरत राजा- ये सब उत्तरफल्गुनी नक्षत्रगत पदार्थ हैं ।
चोर, हाथी, रथ पर चलने वाले, हस्तिसाधनपति, शिल्पी, क्रय-विक्रय द्रव्य, भूसी वाले धान्य, सुनने वाले, वणिक्, तेजस्वी- ये सब हस्त नक्षत्रगत पदार्थ हैं।
अलंकार को जानने वाले, मणि के लक्षण को जानने वाले, रागज्ञ (रंगरेज), लेखक, गान विद्या को जानने वाले, सुगन्धियुत द्रव्य बनाने वाले, गणितज्ञ, जुलाहा, नेत्र- रोगचिकित्सक, राजा के उपयोगी धान्य- ये सब चित्रा नक्षत्रगत पदार्थ हैं।
पक्षी, मृग, अश्व, खरीदने-बेचने वाले, धान्य, छोटे जन्तु, तपस्वी, क्रय-विक्रय में कुशल-ये सब स्वाती नक्षत्रगत पदार्थ हैं।
रक्त पुष्प, रक्त फल, वृष्ठ, तिल, मूंग, कपास (रुई), चना, इन्द्र के भक्त, अग्निभक्त- ये सब विशाखा नक्षत्रगत पदार्थ है।
बली, समूहों में प्रधान, साधुओं के भक्त, संघ में बैठने वाले, वाहन से चलने वाले, जनपदों के साधु, शारदीय धान्य आदि- ये सब अनुराधा नक्षत्रगत पदार्थ हैं।
अति शूर, कुलीन, धनी, यशस्वी, दूसरे के धन का अपहरण करने वाले, दूसरे को जीतने की इच्छा करने वाले राजा, सेनापति- ये सब ज्येष्ठा नक्षत्रगत पदार्थ हैं।
औषध, वैद्य, समूह में प्रधान, पुष्प, मूल और फल से आजीविका चलाने थाले, नव प्रकार के बीज, अतिधनी, फलाहारी, कन्दाहारी- ये सब मूल नक्षत्रगत पदार्थ हैं।
कोमल हृदय वाले, जल-मार्ग से चलने वाले (धोवर, जल में रहने वाले प्राणी आदि), सत्य भाषण करने वाले, दूसरे के धन आदि को नहीं चाहने वाले, धनी, पुल बनाने वाले, जल से आजीविका चलाने वाले, जल से उत्पन्न फल और पुष्प-ये सब पूर्वाषाढा नक्षत्रगत पदार्थ है।
महामात्र ( मुख्य मन्त्री 'महामात्राः प्रधानानि' इत्यमरः) मल्ल, बाहयुद्ध में कुशल, हासी, घोड़ा, देवताओं के भक्त, स्थावर ( वृक्ष आदि), युद्ध में कुशल, भोगी, तेजस्वी- ये सब उत्तराभादा नक्षत्रगत पदार्थ हैं।
मायापटु (मायावी, प्रपञ्ची), सदा सब कामों को करने में उद्यत, उत्साही, धमर्मी, भगवान् के भक्त, सत्य भाषण करने वाले ये सब श्रवणनक्षत्रगत पदार्थ हैं।
अहङ्काररहित, नपुंसक, अस्थिर मित्रता करने वाले, स्त्रीद्वेषी, दानी, बहुत धनी, जितेन्द्रिय-ये सब धनिष्ठा नक्षत्रगत पदार्थ हैं।
पाशिक (जाल से प्राणियों को मारने वाले), मछली मारने वाले, जल में उत्पन्न होने वाले सभी द्रव्य, जलचर जन्तुओं से आजीविका चलाने वाले, सूअर को रखने वाले (डोम आदि), घोवी, मद्य बेचने वाले (कलवार आदि), पक्षियों को मारने वाले- ये सब शतभिषा नक्षत्रगत पदार्थ
चोर, पशुपालक, क्रूर, कीनाश ( क्षुद्र 'कृतान्ते पुंसि कीनाशः क्षुद्रकर्षकयोलिषु' इत्यमरः), नीच जन, शठ (परोपकार से विमुख), विधर्मी, व्रतों से रहित, बाहु-युद्ध को जानने वाले-ये सब पूर्वाभाद्रपदा नक्षत्रगत पदार्थ हैं।
ब्राह्मण, यज्ञ करने वाले, दानी, तपस्वी, अति धनी, आश्रमी (चतुर्थाश्रम में रहने वाले), पाखण्डी (वेदनिन्दक), राजा, उत्तम धान्य- ये सब उत्तराभाद्रपदा नक्षत्रगत पदार्थ हैं।
जल से उत्पन्न होने वाले द्रव्य, फल और फूल, नमक, रल, शङ्ख, मोती, कमल आदि सुगन्ययुक्त फूल, सुगन्धियुत द्रव्य, खरीदने-बेचने वाले, नाविक- ये सभी रेवतो नक्षत्रगत पदार्थ है।
घोड़े को चुराने वाले, सेनापति, वैद्य, सेवक, घोड़ा, घोड़े पर चढ़ने वाले, खरीदने- बेचने वाले, सुन्दर, अग्ररक्षक ये सब अश्विनी नक्षत्रगत पदार्थ है।
रक्तमिश्रित मांस खाने वाले, क्रूर, वध, बन्धन और ताडन करने वाले, भूसी वाले धान्य, नौच कुल में उत्पत्र, उदारता आदि गुणों से रहित ये सब भरणी नक्षत्रगत पदार्थ
पूर्वाफाल्गुनी, पूर्वाषाढा, पूर्वाभाद्रपदा और कृत्तिका ब्राह्मणों के; उत्तरफाल्गुनी, उत्तराषाढा, उत्तराभाद्रपदा और पुष्य क्षत्रियों के
रेवती, अनुराधा, मचा और रोहिणी वैश्यों के; पुनर्वसु, हस्त, अभिजित् और अधिनी क्रय-विक्रय करने वालों के; मूल, आर्द्रा, स्वाती और शतभिषा क्रूर मनुष्यों के
मृगशिरा, ज्येष्ठा, चित्रा और धनिष्ठा सेवकों के तथा आश्लेषा, विशाखा, श्रवणा और भरणी नक्षत्र चाण्डालों के स्वामी होते हैं।
रॉव और शनि से मुक्क, मङ्गल के भेदन या भक्र गमन से दूषित, ग्रहणकालिक, उल्का से हत, चन्द्रकिरण से पीड़ित ( चन्द्रमा जिस नक्षत्र की योगतारा को आच्छादित या उसके दक्षिण भाग में होकर गमन करे) या स्वाभाविक उत्तम गुण सेहत नक्षत्र को मुनि लोग पीड़ित कहते हैं
इस तरह पीड़ित नक्षत्र पूर्वोक्त अपने वर्ग का नारा और उक्त से भित्र लक्षणयुत हो हो उनकी मृद्धि करता है ।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें