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बृहत्संहिता • अध्याय 15 • श्लोक 29
आदित्यहस्ताभिजिदाश्विनानि वणिग्जनानां प्रवदन्ति तानि । मूलत्रिनेत्रानिलवारुणानि भान्युवजातेः प्रभविष्णुतायाः ॥
रेवती, अनुराधा, मचा और रोहिणी वैश्यों के; पुनर्वसु, हस्त, अभिजित् और अधिनी क्रय-विक्रय करने वालों के; मूल, आर्द्रा, स्वाती और शतभिषा क्रूर मनुष्यों के
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