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बृहत्संहिता • अध्याय 15 • श्लोक 20
श्रवणे मायापटवो नित्योद्युक्ताश्च कर्मसु समर्थाः । उत्साहिनः सथर्मा भागवताः सत्यवचनाश्च ॥
मायापटु (मायावी, प्रपञ्ची), सदा सब कामों को करने में उद्यत, उत्साही, धमर्मी, भगवान् के भक्त, सत्य भाषण करने वाले ये सब श्रवणनक्षत्रगत पदार्थ हैं।
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