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बृहत्संहिता • अध्याय 15 • श्लोक 4
रौद्रे वधबन्धानृतपरदारस्तेयशाठ्यभेदरताः । तुषधान्यतीक्ष्णमन्त्राभिचारवेतालकर्मज्ञाः ॥
वध करने वाले, प्राणियों को बाँधने वाले, असत्य भाषण करने वाले, पर-स्त्रीगामी, चोर, शठ (धूर्त), भेद कराने वाले, भूसी वाले धान्य, क्रूर, मन्त्र को जानने वाले, अभिचारज्ञ ( वशीकरण आदि कर्मों को जानने वाले), वेताल के उत्थापन का कर्म जानने वाले-ये सब आर्द्रा नक्षत्रगत पदार्थ हैं।
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