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बृहत्संहिता • अध्याय 15 • श्लोक 5
आदित्ये सत्यौदार्यशौचकुलरूपधीयशोऽर्थयुताः । उत्तमधान्यं वणिजः सेवाभिरताः सशिल्पिजनाः ॥
सत्य भाषण करने वाले, दानी, शौचयुत (शुद्ध), दूसरे के धनादि का लोभ नहीं करने वाले, कुलीन, सुन्दर, बुद्धिमान, यशस्वी, धनी, उत्तम धान्य, वणिक्, सेयक, शिल्पी ये सब पुनर्वसु नक्षत्रगत पदार्थ हैं।
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