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बृहत्संहिता • अध्याय 15 • श्लोक 24
आहिर्बुध्ये विप्राः क्रतुदा उपोयुता महाविभवाः । आश्रमिणः पाखण्डा नरैश्वराः सारधान्यं च ॥
ब्राह्मण, यज्ञ करने वाले, दानी, तपस्वी, अति धनी, आश्रमी (चतुर्थाश्रम में रहने वाले), पाखण्डी (वेदनिन्दक), राजा, उत्तम धान्य- ये सब उत्तराभाद्रपदा नक्षत्रगत पदार्थ हैं।
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