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बृहत्संहिता • अध्याय 15 • श्लोक 13
स्वाती खगमृगतुरगा वणिजो धान्यानि वातबहुलानि । अस्थिर सौहृदलघुसत्त्वतापसाः पण्यकुशलाश्च ॥
पक्षी, मृग, अश्व, खरीदने-बेचने वाले, धान्य, छोटे जन्तु, तपस्वी, क्रय-विक्रय में कुशल-ये सब स्वाती नक्षत्रगत पदार्थ हैं।
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