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बृहत्संहिता • अध्याय 15 • श्लोक 21
वसुभे मानोन्मुक्ताः क्लीबाचलसौहृदाः खियां द्वेष्याः । दानाभिरता बहुवित्तसंयुताः शमपराश्च नराः ॥
अहङ्काररहित, नपुंसक, अस्थिर मित्रता करने वाले, स्त्रीद्वेषी, दानी, बहुत धनी, जितेन्द्रिय-ये सब धनिष्ठा नक्षत्रगत पदार्थ हैं।
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