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बृहत्संहिता • अध्याय 15 • श्लोक 23
आजे तस्करपशुपालहिंस्रकीनाशनीचशठचेष्टाः । धर्मव्रतैर्विरहिता नियुद्धकुशलाश्च ये मनुजाः ॥
चोर, पशुपालक, क्रूर, कीनाश ( क्षुद्र 'कृतान्ते पुंसि कीनाशः क्षुद्रकर्षकयोलिषु' इत्यमरः), नीच जन, शठ (परोपकार से विमुख), विधर्मी, व्रतों से रहित, बाहु-युद्ध को जानने वाले-ये सब पूर्वाभाद्रपदा नक्षत्रगत पदार्थ हैं।
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