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बृहत्संहिता • अध्याय 15 • श्लोक 18
आध्ये मृदवो जलमार्गगामिनः सत्यशीचधनयुक्ताः । सेतुकरवारिजीवकफलकुसुमान्यम्बुजातानि ॥
कोमल हृदय वाले, जल-मार्ग से चलने वाले (धोवर, जल में रहने वाले प्राणी आदि), सत्य भाषण करने वाले, दूसरे के धन आदि को नहीं चाहने वाले, धनी, पुल बनाने वाले, जल से आजीविका चलाने वाले, जल से उत्पन्न फल और पुष्प-ये सब पूर्वाषाढा नक्षत्रगत पदार्थ है।
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