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बृहत्संहिता • अध्याय 15 • श्लोक 27
याम्येऽ सृक्यिशितभुजः कूरा वधबन्यताडनासक्ताः । तुषधान्यं नीचकुलोद्भवा विहीनाश्च सत्त्वेन ॥
रक्तमिश्रित मांस खाने वाले, क्रूर, वध, बन्धन और ताडन करने वाले, भूसी वाले धान्य, नौच कुल में उत्पत्र, उदारता आदि गुणों से रहित ये सब भरणी नक्षत्रगत पदार्थ
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