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बृहत्संहिता • अध्याय 15 • श्लोक 26
अश्विन्यामश्वहराः सेनापतिवैद्यसेवकास्तुरगाः। तुरगारोहा वणिजो रूपोपेतास्तुरगरक्षाः ॥
घोड़े को चुराने वाले, सेनापति, वैद्य, सेवक, घोड़ा, घोड़े पर चढ़ने वाले, खरीदने- बेचने वाले, सुन्दर, अग्ररक्षक ये सब अश्विनी नक्षत्रगत पदार्थ है।
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