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बृहत्संहिता • अध्याय 15 • श्लोक 16
पौरन्दरेऽतिशूराः कुलवित्तयशोऽन्विताः परस्वहृतः । विजिगीषवो नरेन्द्राः सेनानां चापि नेतारः ॥
अति शूर, कुलीन, धनी, यशस्वी, दूसरे के धन का अपहरण करने वाले, दूसरे को जीतने की इच्छा करने वाले राजा, सेनापति- ये सब ज्येष्ठा नक्षत्रगत पदार्थ हैं।
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