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बृहत्संहिता • अध्याय 15 • श्लोक 3
मृगशिरसि सुरभिवस्त्राब्जकुसुमफलरलवनचरविहङ्गाः । मृगसोमपीथिगान्धर्वकामुका लेखहाराश्च ॥
सुगन्धियुक्त द्रव्य, वस्त्र, जलोत्पन्न द्रव्य, पुष्प, फल, रस, वनवासी, पक्षी, मृग, सोमरस का पान करने वाले, विद्या जानने वाले, कामी, पत्रवाहक ये सब पदार्थ मृगशिर है ।
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