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बृहत्संहिता • अध्याय 15 • श्लोक 12
त्वाष्ट्र भूषणमणिरागलेख्यगान्धर्वगन्धयुक्तिज्ञाः। गणितपटुतन्तुवायाः शालाक्या राजधान्यानि ॥
अलंकार को जानने वाले, मणि के लक्षण को जानने वाले, रागज्ञ (रंगरेज), लेखक, गान विद्या को जानने वाले, सुगन्धियुत द्रव्य बनाने वाले, गणितज्ञ, जुलाहा, नेत्र- रोगचिकित्सक, राजा के उपयोगी धान्य- ये सब चित्रा नक्षत्रगत पदार्थ हैं।
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