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बृहत्संहिता • अध्याय 15 • श्लोक 11
हस्ते तस्करकुञ्जररथिकमहामात्रशिल्पिपण्यानि । तुषधान्यं श्रुतयुक्ता वणिजस्तेजोयुताश्चात्र ॥
चोर, हाथी, रथ पर चलने वाले, हस्तिसाधनपति, शिल्पी, क्रय-विक्रय द्रव्य, भूसी वाले धान्य, सुनने वाले, वणिक्, तेजस्वी- ये सब हस्त नक्षत्रगत पदार्थ हैं।
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