Krishjan
🇺🇸 EN
🇮🇳 हिन्दी
मुख्य पृष्ठ
शास्त्र
परिचय
ऐप इंस्टॉल करें
मुख्य पृष्ठ
शास्त्र
परिचय
ऐप इंस्टॉल करें
अध्याय 1 — जयसिंगास पत्र
जयसिंगास पत्र
91 श्लोक • केवल अनुवाद
ए सर्दारों के सर्दार, राजाओं के राजा (तथा) भारतोध्यानकी की कियारियों के व्यवस्थापक।
ए रामचंद्र के चैतन्य हृदयांश, तुझसे राजपूतों की ग्रीवा उन्नत है।
तुझसे बाबरवंश की राज्यलक्ष्मी अधिक प्रवल हो रही है (तथा) शुभ भाग्य से तुझसे सहायता (मिलती) है।
ए जवान (प्रबल) भाग्य (तथा) वृद्ध (प्रौढ) बुद्धि वाले जयशाह, सेवा (अर्थात् शिवा) का प्रमाण तथा आशिष स्वीकृत कर।
जगत् का जनक तेरा रक्षक हो (तथा) तुझको धर्म एवं न्याय का मार्ग दिखावे।
मैंने सुना है कि तू मुझ पर आक्रमण करने (एवं) दक्षिण प्रांत को विजय करने आया है।
हिंदुओं के हृदय तथा आँखों के रक्त से तू संसार में लाल मुँहवाला (यशस्वी) हुआ चाहता है।
पर तू यह नहीं जानता कि यह (तेरे मुँह पर) कालख लग रही है क्योंकि इससे देश तथा धर्म को आपत्ति हो रही है।
यदि तू क्षणमात्र गरेवान में सिर डाले (संकुचित होकर विचार करे) और यदि तू अपने हाथ और दामन पर (विवेक) दृष्टि करे।
तो तू देखे कि यह रंग किसके खून का है और इस रंग का (वास्तविक) रंग दोनों लोक में क्या है (लाल या काला)।
यदि तू स्वयं (अपनी ओर से) दक्षिण विजय करने आता (तो) मेरे सिर और आँख तेरे रास्ते के विछौने बन जाते।
मेरे तेरे हमरकाव (घोड़े के साथ) बड़ी सेना लेकर चलता (और) एक सिर से दूसरे सिरे तक (भूमि) तुझे सौंप देता (विजय करा देता)।
पर तू तो औरंगजेब की ओर से (उस) भद्रजनों के धोखा देने वाले के बहकाने में पड़कर आया है।
अब मैं नहीं जानता कि तेरे साथ कौन खेल खेलूँ। (अब) यदि मैं तुझसे मिल जाऊं तो यह मर्दी (पुरुषत्व) नहीं है।
क्योंकि पुरुषलोग समय की सेवा नहीं करते। सिंह लोमड़ीपना नहीं करते।
और अगर में तलवार तथा कुठार से काम लेता हूँ तो दोनों ओर हिंदुओं को ही हानि पहुँचती है।
बडा खेद तो यह है कि मुसलमानों के खून पीने के अतिरिक्त किसी अन्य कार्य के निमित्त मेरी तलवार को मियान से निकलना पडे।
यदि इस लडाई कि लिए तुर्क आए होते तो (हम) शेरमर्दो के निमित्त (घर बैठे) शिकार आए होते।
पर वह न्याय तथा धर्म से वंचित पापी जो कि मनुष्य के रूप में राक्षस है।
जब अफजल खाँ से कोई श्रेष्ठता न प्रकट हुई (और) न शाइस्तः खाँ की कोई योग्यता देखी।
(तो) तुझको हमारे युद्ध के निमित्त नियत करता है क्योंकि वह स्वयं तो हमारे आक्रमण के सहने की योग्यता रखता नहीं।
(वह) चाहता है कि हिंदुओं के दल में कोई बलशाली संसार में न रह जाय।
सिंहगण आपस ही में (लड-भिड कर) घायल तथा शांत हो जायें जिसमें कि गीदड जंगल के सिंह बन बैठे।
यह गुप्त भेद तेरे सिर में क्यों नहीं बैठता। प्रतीत होता है कि उसका जादू तुझे बहकाए रहता है।
मैंने संसार में बहुत भला बुरा देखा है। उद्यान से तूने फूल और कांटे दोनों संचित किए हैं।
यह नहीं चाहिए कि तू हम लोगों से युद्ध करे (और) हिंदुओं के सिरों को धूल में मिलावे।
ऐसी परिपक्व कर्मण्यता (प्राप्त होने) पर भी जवानी (यौवनोचित कार्य) मत कर, प्रत्युत सादी के इस कथन को स्मरण कर-
सब स्थानों पर घोडा नहीं दौडाया जाता। कहीं कहीं ढाल भी फेंककर भागना उचित होता है।
व्याघ्र मृगादि पर व्याघ्रता करतें हैं। सिंहों के साथ गृहयुद्ध में नहीं प्रवृत्त होते।
यदि तेरी काटने वाली तलवार में पानी है; यदि तेरे कूदने वाले घोड़े में दम है।
(तो) तुझको चाहिए कि धर्म के शत्रु पर आक्रमण करे (एवं) इस्लाम की जड़-मूल खोद डाले।
अगर देश का राजा दारा शिकोह होता। तो हम लोगों के साथ भी कृपा तथा अनुग्रह के बर्ताव होते।
पर तूने जसवंतसिंह को धोखा दिया (तथा) हृदय में ऊँच नीच नहीं सोचा।
तू लोमडी का खेल खेलकर अभी अघाया नहीं है (और) सिंहों से युद्ध के निमित्त ढिठाई करके आया है।
तुझको इस दौड धूप से क्या मिलता है, तेरी तृष्णा तुझे मृगतृष्णा दिखलाती है।
तू उस तुच्छ व्यक्ति के सदृश है जो कि बहुत श्रम करता है (और) किसी सुंदरी को अपने हाथ में लाता है।
पर उसकी सौंदर्य वाटिका का फल स्वयं नहीं खाता (प्रत्युत) उसको अपने प्रतिद्वंदी के हाथ में सौंप देता है।
तू उस नीच की कृपा कर क्या अभिमान करता है। तू जुझारसिंह के काम का परिणाम जानता है।
तू जानता है कि कुमार छत्रसाल पर वह किस प्रकार से आपत्ति पहुँचाना चाहता था।
तू जानता है कि दूसरे हिंदुओं पर भी उस दुष्ट के हाथ से क्या क्या विपत्तियाँ नहीं आई।
मैंने मान लिया कि तूने उससे संबंध जोड़ लिया है और कुल की मर्यादा उसके सिर तोडी है।
(पर) उस राक्षस के निमित्त इस बंधन का जाल क्या वस्तु है क्योंकि यह बंधन तो इजारबंध से अधिक दृढ नहीं है।
वह तो अपने इष्ठ साधन के निमित्त भाई के रक्त (तथा) बाप के प्राण से भी नहीं डरता।
यदि तू राजभक्ति की दोहाई दे तो तू यह तो स्मरण कर कि तूने शाहजहाँ के साथ क्या बर्ताव किया।
यदि तुझको विधाता के यहाँ से बुद्धि का कुछ भाग मिला है (और) पौरुष तथा पुरुषत्त्व की वड मारता है।
तो तू अपनी जन्मभूमि के संताप से तलवार को तपावे (तथा) अत्याचार से दुखियों के आँसू से (उस पर) पानी दे।
यह अवसर हम लोगों के आपस में लडने का नहीं है क्योंकि हिंदुओं पर (इस समय) बडा कठिन कार्य पडा है।
हमारे लडके बाले, देश, धन, देव, देवालय तथा पवित्र देव पूजक-
इन सब पर उसके काम से आपत्ति पड रही है। (तथा) उसका दुःख सीमा तक पहुँच गया है।
कि यदि कुछ दिन तक उसका काम ऐसा ही चलता रहा (तो) हम लोगों का कोई चिह्न (भी) पृथ्वी पर न रह जायगा।
बड़े आश्चर्य की बात है कि एक मुट्ठी भर मुसलमान हमारे (इतने) बडे इस देश पर प्रभुता जमावें।
यह प्रबलता (कुछ) पुरुषार्थ के कारण नहीं है। यदि तुझको समझ की आँख है तो देख।
(कि) वह हमारे साथ कैसी गोटियांचाली करता है और अपने मुँह पर कैसा कैसा रंग रंगता है।
हमारो पावों को हमारी ही साँकलों में जकड देता है (तथा) हमारे सिरों को हमारी ही तलवारों से काटता है।
हम लोगों को (इस समय) हिंदू, हिंदोस्तान तथा हिंदू धर्म (की रक्षा) के निमित्त बहुत अधिक यत्न करना चाहिए।
हमको चाहिए कि यत्न करें और कोई राय स्थिर करें (तथा) अपने देश के लिये खूब हाथ पाँव मारें।
तलवार पर और तदवीर पर पानी दें (अर्थात् उन्हें चमकावें और) तुर्कों को जवाव तुर्की में (जैसे को तैसा) दें।
यदि तू जसवंतसिंह से मिल जाय और हृदय से उस कपट कलेवर के पैंडे पढ जाय।
(तथा) राना से भी तू एकता का व्यवहार कर ले तो आशा है कि बड़ा काम निकल जाय।
चारों तरफ से धावा करके तुम लोग युद्ध करो। उस साँप के सिर को पत्थर के नीचे दबा लो (कुचल डालो)।
कि कुछ दिनों तक वह अपने ही परिणाम के सोच में पड़ा रहे (और) दक्षिण प्रांत की ओर अपना जाल न फैलावे।
(और) मैं इस ओर भाला चलाने वाले वीरों के साथ इन दोनों बादशाहों का भेजा निकाल लूं।
मेघों की भाँति गरजने वाली सेना से मुसलमानों पर तलवार का पानी बरसाऊँ।
दक्षिण देश के पटल पर से एक सिरे से दूसरे सिरे तक इस्लाम का नाम तथा चिह्न धो डालूं।
इसके पश्वात् कार्यदक्ष शुरों तथा भाला चलाने वाले सवारों के साथ।
लहरें लेती हुई तथा कोलाहल मचाती हुई नदी की भाँति दक्षिण के पहाडों से निकल कर मैदान में आऊं।
और अत्यंत शीघ्र तुम लोगों की सेवा में उपस्थित हूँ और फिर उससे तुम लोगों का हिसाब पूछूं।
(फिर) हम लोग चारों ओर से घोर युद्ध उपस्थित करें और लडाई का मैदान उसके निमित्त संकीर्ण कर दें।
हम लोग अपनी सेनाओं की तरंगों को, दिल्ली में, उस जर्जरभूित घर में, पहुंचा दें।
उसके नाम में से न तो औरंग (राजसिंहासन) रह जाय और न जेब (शोभा), न उसकी अत्याचार की तलवार (रह जाय) न कपट का जाल।
हम लोग शुद्ध रक्त से भरी हुई एक नदी बहा दें (और उस से) अपने पितरों की आत्माओं का तर्पण करें।
न्यायपरायण प्राणों के उत्पन्न करने वाले (ईश्वर) की सहायता से हम लोग उसका स्थान पृथ्ची के नीचे (कब्र में) बना दें।
यह काम (कुछ) बहुत कठिन नहीं है। (केवल यथोचित) हृदय, आँख तथा हाथ की आवश्यकता है।
दो हृदय (यदि) एक हो जायँ तो पहाड को तोड सकते हैं (तथा) समूह के समूह को तितिर बितिर कर दे सकते हैं।
इस विषय में मुझको तुझसे वहुत कुछ कहना (सुनना) है, जिसका पत्र में लाना (लिखना) (युक्ति) सम्मत नहीं है।
मैं चाहता हूँ कि हम लोग परस्पर बातचीत कर लें जिसमें कि व्यर्थ दुख तथा श्रम न झेलें।
यदि तू चाहे तो मैं तुझसे साक्षात् करने आऊँ। (और) तेरी बातों का भेद श्रवणगोचर करूँ।
हम लोग बात रूपी सुंदरी का मुख एकांत में खोलें (और) मैं उसके बालों के उलझन पर कंघी फेरूं।
यत्न के दामन पर हाथ धरें। (और) उस उन्मत्त राक्षस पर कोई मंत्र चलावें।
अपने कार्य की (सिद्धि) की ओर का कोई रास्ता निकालें (और) दोनों लोकों (इहलोक तथा परलोक) में अपना नाम ऊँचा करें।
तलवार की शपथ, घोडे की शपथ, देश की शपथ तथा धर्म की शपथ करता हूँ कि इससे तुझ पर कदापि (कोई) आपत्ति नहीं आवेगी।
अफजल खाँ के परिणाम से तू शंकित मत हो क्योंकि उसमें सचाई नहीं थी।
बारह सो बडे लडाके हब्शी सवार वह मेरे लिये घात में लगाए हुए था।
यदि मैं उस पर पहिले ही हाथ न फेरता तो इस समय यह पत्र तुझकों कौन लिखता।
(पर) मुझको तुझसे ऐसे काम की आशा नहीं है (क्योंकि) तुझको भी स्वयं मुझसे कोई शत्रुता नहीं है।
यदि मैं तेरा उत्तर यथेष्ट पाऊँ तो तेरे समक्ष रात्रि को अकेला आऊँ।
मैं तुझको वे गुप्त पत्र दिखाऊं जोकि मैंने शाइस्तः खां के जेब से निकाल लिए थे।
तेरी आँखों पर मैं संशय का जल छिडकूँ (और) तेरी सुखनिद्रा को दूर करूँ।
तेरे स्वप्न का सच्चा सच्चा फलादेश करूँ (और) उसके पश्चात् तेरा जवाब लू।
यदि यह पत्र तेरे मन के अनुकूल न पडे। (तो फिर) मैं हूं और काटने वाली तलवार तथा तेरी सेना।
कल जिस समय सूर्य अपना मुँह संध्या में छिपा लेगा। उस समय मेरा अर्धचंद्र (खङ्ग) मियान को फेंक देगा (मियान से निकल आवेगा)। बस, भला हो।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें