बढ़ीं पुख़्तःकारी जवानी मकुन।
जे सादी मगर यादगीर ई स खुन ॥
ऐसी परिपक्व कर्मण्यता (प्राप्त होने) पर भी जवानी (यौवनोचित कार्य) मत कर, प्रत्युत सादी के इस कथन को स्मरण कर-
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