जे सोजे वतन तेग रा ताबू देह।
जे अश्के सितम दीदःगाँ आब देह ॥
तो तू अपनी जन्मभूमि के संताप से तलवार को तपावे (तथा) अत्याचार से दुखियों के आँसू से (उस पर) पानी दे।
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