वले वर न अज वागे हुस्नश खुरद।
वरस्ते हरीफे वरा वसपुरद ॥
पर उसकी सौंदर्य वाटिका का फल स्वयं नहीं खाता (प्रत्युत) उसको अपने प्रतिद्वंदी के हाथ में सौंप देता है।
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