चु दरियाय पुर शोरिशो मौजजन ।
वर आयमव मैदाँ जे कोहे दकिन ।।
लहरें लेती हुई तथा कोलाहल मचाती हुई नदी की भाँति दक्षिण के पहाडों से निकल कर मैदान में आऊं।
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