न ई चीरःदस्ती जे मर्दानगीस्त।
ववीं गर तुरा चश्मे फ जानगीस्त ॥
यह प्रबलता (कुछ) पुरुषार्थ के कारण नहीं है। यदि तुझको समझ की आँख है तो देख।
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