वख्वाहम कि रानेम वाहह्म सखुन ।
ने यारेम वे सूद रंजो मेहन ॥
मैं चाहता हूँ कि हम लोग परस्पर बातचीत कर लें जिसमें कि व्यर्थ दुख तथा श्रम न झेलें।
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