व जसवंत गर तू सुवाफिक शवी ।
व दिल दर्पए आँ मुनाफिक शवी ।।
यदि तू जसवंतसिंह से मिल जाय और हृदय से उस कपट कलेवर के पैंडे पढ जाय।
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