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जयसिंगास पत्र • अध्याय 1 • श्लोक 24
न ई राज चूँ दर सर आयद तुरा । फुसूनश मगर वर गिरायद तुरा ॥
यह गुप्त भेद तेरे सिर में क्यों नहीं बैठता। प्रतीत होता है कि उसका जादू तुझे बहकाए रहता है।
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