न ई राज चूँ दर सर आयद तुरा ।
फुसूनश मगर वर गिरायद तुरा ॥
यह गुप्त भेद तेरे सिर में क्यों नहीं बैठता। प्रतीत होता है कि उसका जादू तुझे बहकाए रहता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
जयसिंगास पत्र के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
जयसिंगास पत्र के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।