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जयसिंगास पत्र • अध्याय 1 • श्लोक 77
चु ख्वाही वे आयम वृदीदारे तो। वगोश आवरम राजे गुफ्तारे तो॥
यदि तू चाहे तो मैं तुझसे साक्षात् करने आऊँ। (और) तेरी बातों का भेद श्रवणगोचर करूँ।
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