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जयसिंगास पत्र • अध्याय 1 • श्लोक 11
तु खुद आमदी गर वफतहे दकिन। शुदे फर्शे राहत सरो चश्मे मन ॥
यदि तू स्वयं (अपनी ओर से) दक्षिण विजय करने आता (तो) मेरे सिर और आँख तेरे रास्ते के विछौने बन जाते।
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