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जयसिंगास पत्र • अध्याय 1 • श्लोक 81
वतेगो वअस्पो वमुल्को वदीं । कि हर्गिज गजंदत न आयद अजीं ॥
तलवार की शपथ, घोडे की शपथ, देश की शपथ तथा धर्म की शपथ करता हूँ कि इससे तुझ पर कदापि (कोई) आपत्ति नहीं आवेगी।
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